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क्रान्तिकारियों के प्रेरणास्रोत, राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के रचियता श्री बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय जी की जन्मजयन्ती पर विनयपूर्वक प्रणाम...#वंदे_मातरम 🇮🇳🚩#BankimChandraChattopadhyay Ji.. 💐🙏

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शीतल निर्मल कलानिधि ने शुभ्र ज्योत्सना का संचार अम्बर अवनि आँगन में किया है... शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक मंगलकामनाएँ...

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तरुण राठौर जिला अध्यक्ष बने खण्डवा राठौर समाज जीवन साथी प्रकोष्ठ के

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मध्यप्रदेश प्रांतीय राठौर क्षत्रिय सभा. रजि. 16600 (भोपाल) के प्रदेशाध्यक्ष श्री शंभुदयाल जी राठौर के निर्देशानुसार राठौर समाज जीवन साथी प्रकोष्ठ खण्डवा के जिला अध्यक्ष पद के लिए श्री तरूण राठौर जी  नियुक्ति किया गया इसकी घोषणा लक्की राठौर द्वारा की गई, इस उपलक्ष्य में राठौर समाज सकल पंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोविंद प्रसाद जी राठौर, सकल पंच खण्डवा अध्यक्ष बद्री प्रसाद जी, ट्रस्टी सचिव कमलेश जी, सकल पंच जिला अध्यक्ष प्रीतम राठौर, युवा संगठन जिला अध्यक्ष महेश राठौर, उपाध्यक्ष टिंकू राठौर, संघटन मंत्री धर्मेंद्र राठौर, मनोज राठौर, नीलेश राठौर, राजेन्द्र राठौर, नवीन राठौर आदि ने बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की

सेवा कार्य...

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इंदौर इच्छापूर हाईवे पर ग्राम देशगाँव में आए दिन गड्डो के कारण सड़क दुर्घटनाये होकर मोत का शिकार होते हैं  जिससे आज गड्ढे भरने का कार्य किया गया है.. मेरे सहयोगी मित्र शिवम राठौर जी के साथ

जय श्री दादा जी धुनीवाले....

मध्यप्रदेश का खण्डवा जिला है धार्मिक तीर्थों की नगरी... खण्डवा जिले में श्री दादाजी दरबार संत श्री केशवानन्द जी धूनीवाले दादाजी तथा श्री हरिहरानन्द जी का मूल समाधि स्थल है। जिन्हें बडे दादाजी व छोटे दादाजी भी कहा जाता है। नर्मदा संत श्री दादाजी के इस दरबार में अनुशासन तथा सेवा का भाव दर्शनीय है। कहा जाता है यहां आने मात्र से दुखों का नाश हो जाता है। प्रतिवर्ष गुरूपूर्णिमा के पर्व पर यहां लाखों भक्त पहुंचकर श्री समाधियों पर मत्था टेकते है। गुरूपूर्णिमा के समय सम्पूर्ण खण्डवा मेजबान बनकर बाहर से आने वाले श्रध्दालुओं के लिये सेवा भाव के साथ भण्डारों का आयोजन तथा अन्य सेवायें निशुल्क प्रदान करते हैं। यहां आने वाला प्रत्येक दर्शनार्थी महानुभाव यही कहता है कि '' अद्भुत है श्री दादाजी दरबार ''      🚩🚩जय श्री दादाजी🚩🚩 बैकुण्ठ में भी ना मिले, वो सुख दादाजी तेरे खंडवा धाम में है कितनी भी बड़ी विपदा हो, समाधान तो बस धुनीवाले दादाजी तेरे नाम में है। सबके तीर्थ हैं "चारों धाम" मेरा तीर्थ एक दादाजी खंडवा धाम भजलो दादाजी का नाम, भजलो हरिहरजी का नाम
दूसरों को सुनाने के लिए अपनी आवाज ऊँची मत करिए, बल्कि अपना अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाएं की आपको सुनने की लोग मिन्नते करें।